TOP SHAYARI OF JOSH MALIHABADI | जोश मलीहाबादी की टॉप शायरी

TOP SHAYARI OF JOSH MALIHABADI | जोश मलीहाबादी की टॉप शायरी

TOP SHAYARI OF JOSH MALIHABADI | जोश मलीहाबादी की टॉप शायरीImage by Christine Sponchia from Pixabay 

 

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया 
जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया 


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हद है अपनी तरफ़ नहीं मैं भी 
और उन की तरफ़ ख़ुदाई है 

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मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है 
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है 

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मुझ को तो होश नहीं तुम को ख़बर हो शायद 
लोग कहते हैं कि तुम ने मुझे बर्बाद किया 


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तबस्सुम की सज़ा कितनी कड़ी है 
गुलों को खिल के मुरझाना पड़ा है 


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काम है मेरा तग़य्युर नाम है मेरा शबाब 
मेरा ना’रा इंक़िलाब ओ इंक़िलाब ओ इंक़िलाब 


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वहाँ से है मिरी हिम्मत की इब्तिदा वल्लाह 
जो इंतिहा है तिरे सब्र आज़माने की 


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किसी का अहद-ए-जवानी में पारसा होना 
क़सम ख़ुदा की ये तौहीन है जवानी की 


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इंसान के लहू को पियो इज़्न-ए-आम है 
अंगूर की शराब का पीना हराम है 


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इस दिल में तिरे हुस्न की वो जल्वागरी है 
जो देखे है कहता है कि शीशे में परी है 


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आड़े आया न कोई मुश्किल में 
मशवरे दे के हट गए अहबाब 


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इस का रोना नहीं क्यूँ तुम ने किया दिल बर्बाद 
इस का ग़म है कि बहुत देर में बर्बाद किया 


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सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का 
जब उस ने वादा किया हम ने ए’तिबार किया 


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वो करें भी तो किन अल्फ़ाज़ में तेरा शिकवा 
जिन को तेरी निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया 


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हम ऐसे अहल-ए-नज़र को सुबूत-ए-हक़ के लिए 
अगर रसूल न होते तो सुब्ह काफ़ी थी 


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अब तक न ख़बर थी मुझे उजड़े हुए घर की 
वो आए तो घर बे-सर-ओ-सामाँ नज़र आया 


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सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उस ने ये इरशाद किया 
जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया 


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इतना मानूस हूँ फ़ितरत से कली जब चटकी 
झुक के मैं ने ये कहा मुझ से कुछ इरशाद किया? 


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इक न इक ज़ुल्मत से जब वाबस्ता रहना है तो ‘जोश’ 
ज़िंदगी पर साया-ए-ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ क्यूँ न हो 


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जितने गदा-नवाज़ थे कब के गुज़र चुके 

अब क्यूँ बिछाए बैठे हैं हम बोरिया न पूछ 

 
 
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By Gaurav Joshi

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